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    3 साल पहले पिता ने कर दिया था बेटे का अंतिम संस्कार, लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के साथ लौटा घर

    May 13, 2020

    15 वर्षीय एक आदिवासी लड़का 3 साल पहले एमपी के बुंदेलखंड स्थित एक छोटे से गांव से लापाता हो गया था। जंगल में मिले कंकाल को बेटे का मानकर पिता ने अंतिम संस्कार कर दिया था। 3 साल बाद बेटा प्रवासी मजदूरों के साथ अचानक घर पहुंचा, तो लोग उसे देखकर हैरान रह गए।

    लड़का छतरपुर जिले बिलहरी गांव का रहने वाला है। परिजन उसे अचानक से दरवाजे पर देख कर दंग रह गए। लड़के के गायब होने के बाद परिजनों ने पुलिस में शिकायत की थी। कुछ दिन बाद इलाके में कंकाल और कपड़े कुछ टुकड़े मिले। पिता ने कपड़े को अपने बेटे का बताया। उसी के आधार पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

    बेटे को सामने देख कर उदय के पिता ने कहा कि हमने कंकाल का अंतिम संस्कार कर अस्थियों को एक नदी में विसर्जित कर दिया, यह विश्वास करते हुए कि यह हमारा 12 वर्षीय उदय था। लेकिन भगवान दयालु हैं, उसे फिर से वापस ले आया है।

     

    देखकर दंग रह गए

    भगोला ने कहा कि सोमवार को हमारी छोटी सी झोपड़ी का दरवाजा किसी ने खटखटाया। नींद की आंखों के साथ हमने दरवाजा खोला, तो सामने उदय को देखकर हम दंग रह गए। कुछ देर तक तो यकीन ही नहीं हुआ। भगोला ने बताया कि बेटा गुरुग्राम से 600 किलोमीटर पैदल चलकर यहां पहुंचा है।

     

    पिता ने सुनाई कहानी

    नाबालिग के उदय के पिता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 3 साल पहले वह घर से अचानक गायब हो गया था। उसका कुछ पता नहीं चला तो हम लोग पुलिस के पास गए। पुलिस ने उदय के लापता होने की जांच शुरू की। कुछ दिन बाद जंगल में एक नर कंकाल मिला। वहां कुछ फटे कपड़ों के टुकड़े पड़े थे, जिसे देख कर लगा कि हमारे बेटे का ही है। शव इतना क्षत-विक्षत था कि उससे बेटे की पहचान करना मुश्किल था। मुझे लगा कि यही शर्ट पहन कर उदय घर से निकला था।

     

    गांव में जश्न

    उदय की वापसी के बाद पूरा गांव जश्न मना रहा है। अब वह 15 साल का हो गया है, बहुत समझदार और शांत है। घर वापसी के बाद उदय ने पुलिस को बताया कि वह परिवार के साथ बहस कर गांव से भाग कर दिल्ली चला गया था। जिंदा रहने के लिए वह गुरुग्राम में छोटे-मोटे काम करना शुरू कर दिया। लॉकडाउन में मैंने अपनी नौकरी खो दी, उसके बाद वापस लौटने क फैसला किया। मुझे परिवार की याद आ रही थी। प्रवासी मजदूरों के साथ वहां पैदल चल दिया और गांव पहुंच गया।