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    सूर्य ग्रहण के दिन खत्म हो जाएगी दुनिया, वैज्ञानिक ने ट्वीट कर किया दावा

    Jun 13, 2020

    New Delhi: इस वक्त दुनिया कोरोना महामारी ( Coronavirus ), चक्रवाती तूफान ( Cyclone ), भूकंप ( Earthquake ) की घटनाओं से जूझ रहा है. वही इन सब के बीच एक चौका देने वाली खबर आ रही है. अब दावा किया जा रहा है कि 21 जून 2020 को दुनिया खत्म हो जाएगी. इस दावे के बाद लोग डरे हुए हैं और अफवाहों का बाजार गर्म हो गया है.

    बता दें कि धर्म ग्रंथों में दुनिया के खत्म होने की बात तय है. दुनिया खत्म होने की बात कई बार कही गई हैं. कुछ वैज्ञानिकों ने अप्रैल 2020 में भी दुनिया खत्म होने की भविष्यवाणी की थी पर यह भविष्यवाणी कोरी साबित हुई. इस दावे के बाद सोशल मीडिया व इंटरनेट में तरह-तरह की बातें हो रही हैं.

    गौरतलब है कि 21 जून को सूर्य ग्रहण भी लगने जा रहा है और तब ही दुनिया खत्म होने की बात भी सामने आ रही हैं. ऐसे में कई लोग कई तरह के कयास लगा रहे हैं और सोशल मीडिया में कई तरह की बातें सामने आ रही है.

     

    किस आधार पर दावा

    दुनिया खत्म होने का दावा ग्रेगोरिअन कैलेंडर के आधार पर किया जा रहा है. दरअसल, ग्रेगोरिअन कैलेंडर 1582 में लागू किया गया था. उस वक्त साल में 11 दिन कम हो जाते हैं. भले ही 11 दिन सुनने में कन लग रहा है लेकिन 286 साल में यह लगातार बढ़ता रहा. कुछ लोगों का कहना है कि अभी हमें 2012 में रहना चाहिए. इस दावे को बल तब मिल जब वैज्ञानिक पाओले तगलोगुइन ने ट्वीट कर दिया.

    ‘2012 में हैं हम’

    पाओले के ट्वीट में कहा कि जूलियन कैलेंडर की माने तो हम तकनीकि रूप में साल 2012 में हैं. ग्रेगोरिअन कैलेंडर में जाने से हमें एक साल में 11 दिनों का नुकसान हुआ. ग्रेगोरिअन कैलेंडर को लागू हुए 268 साल बीत चुके हैं. इस तरह से अगर 11 से गुणा करें तो 2948 दिन होते हैं। 2948 दिन बराबर 8 साल होते हैं. हालांकि बाद में वैज्ञानिक पाओलो ने अपना ट्वीट डिलीट भी कर दिया.

     

    क्या है ग्रेगोरियन व जूलियन कैलेंडर

    बता दें कि ग्रेगोरियन कैलेंडर दुनिया में लगभग हर जगह उपयोग किया जाने वाला कालदर्शक या तिथिपत्रक है. यह जूलियन कालदर्शक का रूपान्तरण है. इसे पोप ग्रेगोरी ने लागू किया था.इस दावे की बात तब सामने आई जिसमें कहा जा रहा था कि सुमेरिअन लोगों ने एक ग्रह नीबीरु की खोज की थी. निबिरू ग्रह अब पृथ्‍वी की ओर बढ़ रहा है. सबसे पहले दावा किया गया था कि मई 2003 में दुनिया का खात्‍मा हो जाएगा लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो इसकी डेट बढ़ाकर 21 दिसंबर 2012 कर दी गई.