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    बिहार में ‘लहराते बाल’ मंजूर नहीं, प्रिंसिपल बोले- चोटी बनाकर कॉलेज आएं स्टूडेंट्स

    Aug 24, 2021

    भागलपुर. सुंदरवती महिला महाविद्यालय (Sundervati Women’s College Bhagalpur) में इंटर (सत्र: 2021-23) की छात्राओं के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया गया है. इस नए ड्रेस कोड में छात्राओं के खुले बालों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इतना ही नहीं छात्राओं को कालेज परिसर के अंदर सेल्फी लेने पर रोक लगा दी गई है.

    ड्रेस कोड में छात्राओं को सख्त निर्देश दिया गया है कि वो खुले और लहराते बालों में कॉलेज नहीं आएं बल्कि, बालों में चोटी बांधकर कॉलेज परिसर में प्रवेश करें, ऐसा नहीं करने पर कॉलेज में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. कॉलेज प्रबंधन के नए ड्रेस कोड से हंगामा मच गया है और कॉलेज प्रबंधन के इस फैसले का छात्राएं विरोध कर रही हैं. छात्र संगठनों ने भी इसे तुगलकी फरमान बताया है.

    हालांकि प्राचार्य रमन सिन्हा ने यह भी कहा है कि नए ड्रेस कोड वाले नियम के अंतर्गत ही छात्राओं को बालों में चोटी बना कर महाविद्यालय में प्रवेश करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इस नए ड्रेस कोड से जिस किसी को भी आपत्ति है, वह लिखित में इसकी शिकायत करें और इसके साथ ही वह सुझाव भी दे कि नए ड्रेस कोड को और कैसे बेहतर बनाया जाए.

    बता दें कि एसएम कॉलेज प्रबंधन (MS College Bhagalpur Management) ने इसके अलावा नए ड्रेस कोड में छात्राओं के लिए कई अन्य निर्देश भी जारी किए हैं. कॉलेज सूत्रों के मुताबिक, एसएम कॉलेज में बारहवीं के तीनों संकाय यानी विज्ञान, वाणिज्य और कला संचालित होते हैं, इसमें 1500 छात्राएं नामांकित हैं. जिसके लिए हाल ही में प्राचार्य प्रो. रमन सिन्हा ने कॉलेज का नया ड्रेस कोड तय करने के लिए एक कमेटी का गठन किया.

    वहीं, कमेटी ने नए सत्र में रॉयल ब्लू कुर्ती, सफेद सलवार, सफेद दुपट्टा, सफेद जुड़ाव, काला जूता और बालों में दो या एक चोटी लगाने का निर्देश दिया है. इसके अलावा सर्दी के मौसम में रॉयल ब्लू ब्लेजर और कार्डिगन पहनने का निर्देश है. इस निर्देश में साफ बताया गया कि बिना ड्रेस कोड के महाविद्यालय में प्रवेश नहीं मिलेगा. छात्राओं की ज्यादा नाराजगी बालों की चोटी वाले फरमान पर है.

    हालांकि कहा गया है कि कुछ छात्राओं ने कॉलेज के इस फैसले का स्वागत किया है. एसएम कॉलेज के प्राचार्य प्रो. रमन सिन्हा ने नए ड्रेस कोड पर कहा कि नोटिस जारी कर दिया गया है. छात्राओं को यह नियम मानना होगा. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मीडिया और कुछ छात्राएं इसे बेवजह तूल दे रहे हैं, लेकिन इससे फैसला वापस नहीं लिया जा सकता. बहरहाल फैसला वापस होगा या नहीं यह तो आने वाला वक्त बताएगा, कॉलेज के इस आदेश ने नई बहस छेड़ दी है.