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    जॉब पर खतरा, देश की 72 फीसदी MSME ने कहा- बिना छंटनी के नहीं टलेगा संकट

    Jun 6, 2020

    कोरोना महामारी के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट दर्ज की गई है. कई कंपनियां कर्मचारियों को हटा रही है या कॉस्ट कटिंग के नाम पर सैलरी कट कर रही है. इन सबके बीच एक सर्वे सामने आया है, जो बहुत ही डरावने वाला है.

     

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, देश की 72 फीसदी MSME का कहना है कि कारोबार को सूचारू रूप से चलाने के लिए कर्मचारियों की छंटनी करनी ही होगी. अर्थात कॉस्ट कटिंग के लिए कर्माचारियों की संख्य कम करनी होगी. वहीं, 14 फीसदी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों का कहना है कि वे बिना छंटनी के ही कारोबार को आगे बढ़ाएंगे।

     

    ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन और 9 अन्य औद्योगिक संगठनों की ओर से साझा तौर पर किए गए सर्वे में ये बातें सामने आई है। इसके अलावा कॉरपोरेट जगत में 42 पर्सेंट उद्योगों ने कहा है कि आगे काम जारी रखने के लिए उन्हें वर्कफोर्स में कमी करनी होगी। सिर्फ 18 पर्सेंट कंपनियों का कहना है कि छंटनी करने की आवश्यकता नहीं है, मौजूदा वर्कफोर्स के साथ ही काम को आगे बढ़ाया जाएगा.

     

    46525 लोगों ने लिया था हिस्सा

    ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के इस सर्वे में एमएसएमई सेक्टर, सेल्फ एंप्लॉयड और कॉरपोरेट सीईओ जैसे 46,525 लोगों ने हिस्सा लिया था। 24 मई से 30 मई के बीच किए गए इस सर्वे में कहा गया है कि लघु एवं मध्यम उद्योगों को सैलरी की पेमेंट में संकट का सामना करना पड़ रहा है।

     

    क्या है समस्या

    सर्वे के मुताबिक 32 फीसदी उद्योगों को सैलरी की पेमेंट की चिंता है। इसके अलावा 20 फीसदी का कहना था कि मौजूदा मैनपावर के साथ उनके लिए काम करना महंगा होगा. 15 फीसदी ने नए ऑर्डर में कमी आने और इतने ही लोगों ने कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई है.

     

    सेल्फ एंप्लॉयड लोगों का क्या है कहना

    सेल्फ एंप्लॉयड लोगों की सबसे बड़ी चिंता ईएमआई अदा करना है. इनमें से 36 फीसदी लोगों का कहना है कि पहले हुए काम की पेमेंट हासिल करने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा नए ऑर्डर भी नहीं मिल पा रहे हैं और जो मिल रहे हैं उनके लिए वाजिब दाम नहीं मिल रहा है.