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    पेट्रोल पंप पर काम करते थे पिता, बेटे को IAS बनाने के लिए बेच दिया था घर

    Aug 4, 2020

    Indore. यूपीएससी का रिजल्ट आ गया है। इंदौर के रहने वाले प्रदीप सिंह ने पूरे देश में 26th रैंक हासिल किया है। प्रदीप मूल रूप से बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं। लेकिन उनका परिवार इंदौर में ही रहता है। प्रदीप सिंह की सफलता पर उनके परिवार में खुशी की लहर है।

    इंदौर में रहने वाले प्रदीप सिंह ने यूपीएससी की परीक्षा में 26वां स्थान हासिल किया है। 2018 में भी उन्होंने यूपीएससी क्वालिफाई किया था। उस साल उन्हें इंडियन रेवन्यू सर्विस मिला था। प्रदीप अभी इनकम टैक्स में असिस्टेंट कमिश्नर के तौर पर कार्यरत है। यहां तक पहुंचने के लिए प्रदीप ने काफी संघर्ष किया है। प्रदीप सिंह को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए उनके पिता सब कुछ कुर्बान कर दिया था।

    एक रैंक से दूर रह गया था सपना

    दरअसल, प्रदीप सिंह शुरू से ही आईएएस ही बनना चाहते थे। 2018 की परीक्षा में उनका रैंक 93 था। प्रदीप ने बताया कि पिछले साल 92 रैंक वालों को आईएएस मिला था। मैं बस एक रैंक से पिछे रह गया था। इस बार मुझे काफी मेहनत करनी पड़ी है। लेकिन इस सफलता से काफी खुश हूं। मैंने फिर से रैंक ठीक करने के लिए परीक्षा दिया था। मेरा टारगेट 70-80 में जगह बनाना था।

    मैं पूरी निष्ठा से काम करूंगा

    वहीं, कैडर को लेकर प्रदीप सिंह ने कहा कि मैं पॉजिटिव मकसद के साथ इसमें आया हूं। मुझे जो भी कैडर मिलेगा, वहां मैं पूरी मेहनत के साथ काम करूंगा। इस सहयोग के लिए मैं सभी लोगों को धन्यवाद देता हूं।

    माला पहनाकर किया स्वागत

    बेटे की सफलता पर परिवार में खुशी का माहौल है। पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है। रिजल्ट आते ही उन्होंने बेटे को माला पहनाकर स्वागत किया। प्रदीप के रिश्तेदार भी इंदौर में रहते हैं। घर पर बधाई देने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है। प्रदीप की मां ने कहा कि बेटे की सफलता पर बहुत गर्व है।

    पेट्रोल पंप पर पिता करते हैं काम

    पिछले साल प्रदीप के पिता ने बेटे की सफलता पर कहा था कि मैंने इसकी पढ़ाई के लिए घर तक बेच दिया था। प्रदीप के पिता इंदौर स्थित एक पेट्रोल पंप पर काम करते हैं। प्रदीप 2017 में इंदौर से दिल्ली यूपीएससी की तैयारी के लिए गए थे। पहली ही बार में प्रदीप ने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली थी। उन्होंने कहा है कि बेटे की पढ़ाई पूरी करवाने में मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा है।

    इंदौर में बेच दिया था मकान

    प्रदीप के पिता 1991 में ही इंदौर आ गए थे। इंदौर में वह एक पेट्रोल पंप पर कमाई करते थे। उसी से बचत कर उन्होंने इंदौर में एक मकान बनाया था। उन्होंने बताया कि पैसों की तंगी की वजह से मुझे उसे मकान को बेचना पड़ा था। प्रदीप ने कहा था कि पिताजी ने मकान बेचने से पहले जरा सा भी नहीं सोचा कि मैं ऐसा क्यों कर रहा हूं।