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    भोपाल गैस त्रासदी विशाखापट्टनम हादसा से ज्यादा खतरनाक था

    May 7, 2020

    7 मई 2020 को आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में जिस तरह का मंजर दिखाई दे रहा है, ठीक उसी तरह का मंजर 3 दिसंबर 1984 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दिखाई दे रहा था। दरअसल, आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एलजी पॉलीमर्स इंडस्ट्री से जहरीली गैस लीक हुई है। ठीक इस तरह 3 दिसंबर 1984 में भोपाल में भी जहरीली गैस का रिसाव हुआ था।

    जानकारी के अनुसार, यह हादसा विशाखापट्टनम से करीब 30 किलोमीटर वेंकटपुरम गांव में हुआ है। अब तक इस गैस के कारण 8 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 5000 हजार से अधिक लोग इसके चपेट में आए हैं। प्रशासन की ओर से इलाके में राहत का काम जारी है। स्थानीय पुलिस के साथ एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है और लोगों को प्रभावित इलाके से दूर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील कर रही है।

    यादें ताजा कर दी

    भोपाल शहर में 3 दिसम्बर 1984 को बिल्कुल ऐसी ही घटना हुई थी। इसे भोपाल गैस कांड या भोपाल गैस त्रासदी के नाम से जाना जाता है। भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड नामक कंपनी के कारखाने से जहरीली गैस का रिसाव हुआ जिससे लगभग 15000 से अधिक लोगो की जान गई ( सरकारी आंकड़े के अनुसार, 3787 ) तथा 5 लाख से ज्यादा लोग अनेक तरह की शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन के भी शिकार हुए। जिसका असर आज भी वहां के लोगों पर स्पष्ट देखा जा सकता है।

    अब भी मौजूद है त्रासदी का असर

    दरअसल, 3 दिसंबर 1984 को यूनियन कार्बाइड की फर्टिलाइजर फैक्ट्री से जहरीले गैस का रिसाव शुरू हुआ और पूरे शहर में बादल की तरह छा गया। तब लोग सो रहे थे और कई लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जिनकी जानें बच गईं, उनके फेफड़े कमजोर पड़ गए और आखें खराब हो गईं। इनमें से कई की तो सुधबुध चली गई और वो मनोरोगी हो गए। यहीं नहीं, कोरोना काल में भोपाल में अब तक जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें से अधिकतर इसी त्रासदी के शिकार थे। इसी अंदाजा लगा सकते हैं कि भोपाल गैस कांड कितना खतरनाक था।