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    तृणमूल की नई को-ऑर्डिनेशन कमेटी की पहली बैठक में ही शुभेंदु नदारद, चर्चाओं का बाजार गरम

    Aug 2, 2020

    Kolkata. बंगाल में 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव की लड़ाई को लेकर तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी ने हाल में अपने चुनिंदा नेताओं व मंत्रियों की जो 21 सदस्यीय नई को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाई है, उसकी शनिवार को पहली बैठक कोलकाता में तृणमूल भवन में बुलाई गई थी.

    इस बैठक में कमेटी के सभी सदस्यों को उपस्थित रहने के लिए कहा गया था किंतु एक प्रमुख सदस्य व राज्य के परिवहन मंत्री शुभेंदु अधिकारी मौजूद नहीं थे. शुभेंदु के अलावा तीन और नेता जो इस कमेटी में हैं, वह भी उपस्थित नहीं थे. इसको लेकर राजनीतिक हलकों के में चर्चा का बाजार गर्म हो गया.

    हालांकि इसको लेकर तृणमूल के महासचिव व को-ऑर्डिनेशन कमेटी के प्रमुख पार्थ चटर्जी ने साफ कहा कि शुभेंदु अन्य कार्य में व्यस्त हैं, इसीलिए नहीं आ पाए. उन्होंने यह भी दावा किया कि कमेटी के सभी सदस्यों के साथ समन्वय करके शुभेंदु चल रहे हैं.

    तृणमूल भवन में जो यह बैठक बुलाई गई थी वह वर्चुअल नहीं थी बल्कि आमने-सामने की हुई. इसमें कुल 4 सदस्य उपस्थित नहीं थे. शुभेंदु के अलावा अनुपस्थित रहने वालों में देबू टूडू, मृगांक महतो व हितेन बर्मन शामिल हैं. इनमें देबू टूडू कोरोना से संक्रमित हैं.

    वहीं अन्य दो लोग संगठन के काम में व्यस्त रहने के कारण बैठक में नहीं आए. ये बात को-ऑर्डिनेशन कमेटी के प्रमुख पार्थ चटर्जी ने कही. पार्टी का यह भी कहना है कि हितेन बर्मन व मृगांक महतो की अनुपस्थिति के साथ शुभेंदु की तुलना करना सही नहीं है.

    हालांकि पार्टी भले दावा करे लेकिन शुभेंदु की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठने लगा है कि शुरू में ही इस कमेटी में मतभेद सामने आ गया है. वहीं, इस बैठक में मौजूद ममता बनर्जी के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ( पीके ) की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

    सूत्रों के अनुसार, वह बैठक में मौजूद रहे लेकिन एक भी शब्द नहीं बोले. दरअसल, तृणमूल द्वारा हाल में यह सब जितनी भी कमेटी बनाई गई है उसके सूत्रधार पीके ही हैं. लेकिन, वह बैठक में एक शब्द नहीं बोले. ऐसे में तृणमूल की यह राज्य स्तरीय को-ऑर्डिनेशन कमेटी की पहली ही बैठक को लेकर सवाल खड़ा हो गया है.

    गौरतलब है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तृणमूल ने हाल में पार्टी संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल करते हुए कई नई कमेटी गठित करने के साथ कई जिला अध्यक्षों को भी बदल दिया है.