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    मजदूरों की ‘घर वापसी’ से गड़बड़ा सकती है अर्थ व्यवस्था, सरकारों की अपील- मत जाओ, हम करेंगे हर व्यवस्था

    May 2, 2020

    दूसरे प्रदेशों में फंसे लाखों मजदूर किसी भी तरह अपने घर पहुंचना चाहते हैं। ऐसे में बहुत से प्रदेशों की समझ में आने लगा है कि जैसे ही उनके यहां आर्थिक गतिविधियां चालू होंगी उनके यहां श्रमिकों की किल्‍लत होने लगेगी। इसलिए इन प्रदेशों की सरकारें अपने यहां रहने वाले प्रवासी मजदूरों से वहीं रुके रहने का आग्रह करने लगी हैं।

    कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री बीएस येदियुरप्‍पा ने शुक्रवार को कहा कि हम बहुत जल्‍द आर्थिक गतिविधियां शुरू करने का मन बना चुके हैं। हमने एंप्‍लायर्स से अपील की है कि वे अपने यहां काम करने वालों के हितों की रक्षा करें और उन्‍हें सैलरी वगैरह दें। मेरा सभी प्रवासी मजदूरों से हार्दिक निवेदन है कि वे यहीं रुकें और हमारे साथ सहयोग करें।

    इधर, तेलंगाना सरकार ने अपने जिला अधिकारियों से कहा है कि वे मजदूरों की पहचान करके उन्‍हें भरोसा दिलाने की कोशिश करें कि जल्‍द ही काम शुरू होने वाला है। राज्‍य के चीफ सेक्रटरी सोमेश कुमार का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल्द उद्योग शुरू होने वाले हैं, इसलिए अधिकांश श्रमिकों ने रुकने का फैसला किया है।

    गड़बड़ा सकती है बेंगलुरु की अर्थव्‍यवस्‍था

    बेंगलुरु में आईटी और आईटी से जुड़ी सेवाओं को छोड़ दिया जाए तो करीब 8 लाख प्रवासी मजदूर यहां रहते हैं, जिन पर यहां की अर्थव्‍यवस्‍था निर्भर है। ठेकेदार, बिल्‍डर, ट्रेड यूनियन और कार्यकर्ताओं का कहना है कि इनमें से लगभग 50 फीसदी से अधिक अपने गांवों को लौट जाएंगे और इसका असर शहर की अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ेगा।