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    पहली बार राज्यसभा में ज्योतिरादित्य, सिंधिया के बारे में यहां जानें सब कुछ

    Jun 19, 2020

    Bhopal: राज्यसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं। कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव जीत गए हैं। बीजेपी में शामिल होने के अगले ही दिन उन्हें राज्यसभा का टिकट मिल गया था। उसके बाद उन्होंने भोपाल आकर नामांकन दाखिल किया था।

    भोपाल से दिल्ली लौटते वक्त उनका विरोध भी हुआ था। चुनाव नतीजे आने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए खुशी का पल है। लेकिन इस मौके पर वह भोपाल में मौजूद नहीं थे। सिंधिया कोरोना से मात देकर 3 दिन पहले ही घर लौटे हैं। ऐसे में उनका भोपाल आना संभव नहीं था। सिंधिया की अनुपस्थिति में बीजेपी के कई केंद्रीय नेता उन्हें जीत दिलाने के लिए भोपाल में कैंप किए हुए थे।

    कांग्रेस में अनदेखी से नाराज थे सिंधिया

    ज्योतिरादित्य सिंधिया को राजनीति विरासत में मिली है। पिता माधवराव सिंधिया के निधन के बाद वह सक्रिय राजनीति में आए थे। गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट से वह चुनाव लड़ते रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया हार गए। उसके बाद से ही वह कांग्रेस में असहज महसूस कर रहे थे। पार्टी फोरम में कई बार अपनी बात रखनी की कोशिश की लेकिन सुनी नहीं गई। एमपी में कांग्रेस में गुटबाजी की वजह से सिंधिया हाशिए पर चले गए थे। 2018 का विधानसभा चुनाव के नतीजे जब कांग्रेस के पक्ष में आए थे, तो उन्हें लगा कि प्रदेश की कमान पार्टी उन्हीं को सौंपेगी। लेकिन कमलनाथ को जिम्मेदारी दे दी गई।

    यूपी भेज दिया गया

    सीएम के लिए कमलनाथ के नाम की घोषणा के बाद से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में आहत महसूस कर रहे थे। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें एमपी से दूर करने के लिए पश्चिमी यूपी का लोकसभा चुनाव में प्रभारी बना दिया था। सिंधिया यूपी में कोई खास कमाल तो नहीं कर पाए। साथ ही एमपी में बीजेपी के कृष्णपाल यादव से अपनी परंपरागत सीट भी हार गए। उसके बाद सिंधिया सरकार में रहते हुए कमलनाथ पर इशारों-इशारों में हमला बोलना शुरू कर दिया। मार्च 20202 में स्थिति ज्यादा बिगड़ गई और सिंधिया, कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए।

    मार्च में बीजेपी में आ गए सिंधिया

    कमलनाथ के साथ मतभेद के बाद मार्च 2019 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात कर बीजेपी में शामिल हो गए। सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद उनके 22 समर्थक विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया, जिसमें 6 कमलनाथ की सरकार में कैबिनेट मंत्री थी। सिंधिया समर्थकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस की सरकार गिर गई। सिंधिया की मदद से एमपी में फिर से बीजेपी की सरकार बनी है।

    केंद्र में बन सकते हैं मंत्री

    ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्यसभा चुनाव जीत गए हैं। उनके समर्थकों ने पूर्व में भी यह इच्छा जाहिर की है कि महाराज मोदी सरकार में मंत्री बनें। सोशल मीडिया पर अभी भी उनके कुछ समर्थक यह कैंपेन चला रहे हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्र में मंत्री बनें। वहीं, इस पर फैसला बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को लेना है।

    कौन हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया

    ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर राजघराने से आते हैं। उनके पिता माधव राव सिंधिया केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं। 49 साल के ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म 1 जनवरी 1971 को हुआ है। सिंधिया की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई कैंपियन और दून स्कूल से हुई है। उसके हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन और स्टैनफोर्ड से एमबीए किया है। सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे हैं, दोनों के 2 बच्चे हैं। बेटा महाआर्यमन ने हाल ही में ग्रैजुएशन किया है।

    सिंधिया का राजनीतिक करियर

    ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिता माधवराव सिंधिया के 2001 में निधन के बाद राजनीति में कदम रखा। उन्होंने पिता के निधन के बाद खाली हुई सीट से 2002 में गुना से चुनाव लड़ा। उसके बाद वह लगातार चुनाव जीतते रहे। 2004, 2009 और 2014 में गुना-शिवपुरी से ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद बनें। इसके साथ ही वह यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहें हैं।