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    सबने छोड़ा साथ, आखिरी समय तक याकूब ने नहीं छोड़ा दोस्त अमृत का हाथ

    May 16, 2020

    कोरोना काल में मानवता पर संकट छा गया है, लेकिन इंसानियत की मिसालों से एक हौसला बंधता है, एक उम्मीद बंधती है कि यह वक्त भी बीत जाएगा और मानवता जीत जाएगी। कोरोना वायरस के प्रकोप से जूझ रहे मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में इंसानियत की ऐसी ही मिसाल देखने को मिली है।

     

    तबीयत बिगड़ी तो ट्रक से उतार चले गए साथी

    कोरोना संदिग्ध 24 वर्षीय अमृत गुजरात के सूरत से यूपी के बस्ती जिला स्थित अपने घर एक ट्रक के जरिए लौट रहा था। उस ट्रक में कई और लोग सवार थे। ट्रक जब मध्य प्रदेश के शिवपुरी-झांसी फोरलेन से गुजर रहा था, तभी अमृत की तबीयत बिगड़ने लगी। साथियों को लगा कि अमृत को कोरोना है, इसलिए डर के मारे उसे वहीं उतार दिया।

     

    जब ट्रकवाले ने अमृत को ट्रक से उतारा तो याकूब ने उसका साथ नहीं छोड़ा और खुद भी ट्रक से उतर गया। अमृत बेहोशी की हालत में था। दोस्त को ऐसी हालत में देखते हुए याकूब ने कोरोना के डर के बावजूद अमृत का हाथ थामा और उसका सिर अपनी गोद में रख लिया।

     

    लोगों ने उसे देखा तो उसकी मदद की। लोगों की मदद से अमृत को लेकर याकूब उसको लेकर जिला अस्पताल तक पहुंचा। अमृत की गंभीर हालत देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत वेंटीलेटर पर रखा, लेकिन इलाज के दौरान अमृत ने दम तोड़ दिया।

     

    आखिरी समय तक नहीं छोड़ा साथ

    जिला अस्पताल में मौजूद याकूब मोहम्मद ने बताया कि हम दोनों गुजरात के सूरत स्थित फैक्ट्री में मशीन से कपड़ा बुनने का काम करते थे। लॉकडाउन के कारण फैक्ट्री बंद हो गई। सूरत से ट्रक में 4-4 हजार रुपये किराया देकर नासिक, इंदौर होते हुए कानपुर लौट रहे थे। सफर के दौरान अचानक अमृत की हालत बिगड़ गई।

     

    अमृत को तेज बुखार आया और उल्टी जैसी स्थित बनने लगी, हालांकि उल्टियां नहीं हुईं। ट्रक में बैठे लोग विरोध करने लगे और अमृत को उतारने की जिद करने लगे। ट्रकवाले ने अमृत को उतार दिया तो अमृत का ख्याल रखने के लिए मैं भी उतर गया, हालांकि अपने दोस्त को नहीं बचा पाया, इसका मुझे जिंदगी भर मलाल रहेगा।