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    चीन विवाद पर मोदी सरकार से RSS खुश नहीं है! युद्ध नहीं पर इस रणनीति पर काम करे सरकार

    Jun 24, 2020

    New Delhi. लद्दाख में भारत और चीन के बीच पिछले 2 महीने से तनाव जारी है. इसे लेकर आरोप प्रत्यारोप की सियासत भी हो रही है. वहीं 15 जून को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में 20 जवान शहीद हो गए. विपक्ष का कहना है कि मोदी सरकार इस मुद्दे को ठीक तरीके से हैंडल नहीं कर सकी.

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन मुद्दे पर मोदी सरकार से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ( RSS ) नाराज है. हालांकि RSS ने अब तक इजहार नहीं किया है. बताया जा रहा है कि RSS युद्ध के पक्ष में नहीं है लेकिन वह कोरोना की वजह से दुनियाभर में उपजी चीन विरोधी भावनाओं के जरिए चीन को अलग-थलग करने का समर्थन करता है.

    एक अंग्रेजी अखबार के रिपोर्ट के अनुसार, RSS का कहना है कि हमें अपने सैनिकों की शहादत के लिए चीन के साथ युद्ध में जाने की जरूरत नहीं है लेकिन हमें सैन्य के साथ-साथ अन्य फ्रंटस पर लड़ने की जरूरत है. रिपोर्ट के अनुसार, RSS मौजूदा और पूर्व सरकारों को चीन के बारे में सावधान करती रही है उसके खिलाफ ताकतवार नीतियां बनाने के लिए भी कहा है. RSS का कहना है कि गलवान घटना के बाद अब सरकार खुद समझ गई होगी कि कम्युनिस्टों का किसी भी सूरत में भरोसा नहीं किया जा सकता.

    बता दें कि चीनी तनाव के अभी RSS खुले तौर पर सरकार की नीतियों सवाल नहीं उठाए हैं लेकिन संगठन से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने चीन से व्यापार पर रोक लगाने की मांग उठानी शुरू कर दी है. इसको लेकर मंच के कार्यकर्ता देशभर में प्रदर्शन कर सरकार के सामने कई मांगें रख रहे हैं.

    आरएसएस के मुखपत्र ‘द ऑर्गनाइजर’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर के अनुसार, दुनियाभर में Covid-19 फैलने के बाद चीन विरोधी भावनाए भड़की है, ऐसे में भारत के पास मौका है कि चीन विरोधी भावनाओं का फायदा उठाकर चीन को अलग-थलग करने दुनिया का नेतृत्व करें. प्रफुल्ल केतकर के अनुसार, चीन से युद्ध से ज्यादा जरूरी है उसे दूसरी मोर्चे पर सीमित करना है. हालांकि केतकर ने साफ कर दिया कि यह बात वे RSS के कार्यकर्ता के तौर पर नहीं बोल रहे हैं.