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    एमपी में कांग्रेस को लग रहे झटके पर झटके, ज्योतिरादित्य सिंधिया हो रहे ‘कमजोर’?

    Jul 24, 2020

    Bhopal. उपचुनाव से पहले बीजेपी एमपी में एक खास रणनीति के तहत काम कर रही है। एक तीर से शिवराज सिंह चौहान 2 जगहों पर निशान लगा रहे हैं। अभी तक उस दिशा में कुछ हद तक कामयाब होते भी दिख रहे हैं। एमपी में बीजेपी की रणनीति से कांग्रेस लगातार कमजोर हो रही है। पूरा कूनबा बिखरता जा रहा है। लेकिन इसका ज्योतिरादित्य सिंधिया पर भी उतना असर पड़ रहा है। शिवराज अपने प्लान से एमपी में आत्मनिर्भर होने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

    दरअसल, एमपी विधानसभा में 230 सीट है। किसी भी पार्टी को सत्ता में रहने के लिए 116 विधायकों को जरूरत होती है। बीजेपी के पास अपने 107 विधायक हैं। यानी की सत्ता में बने रहने के लिए 9 विधायकों की जरूरत और पड़ेगी। वहीं, कांग्रेस के पास अभी 87 विधायक हैं। सत्ता में वापसी के लिए पार्टी को 29 विधायक चाहिए। उपचुनाव 27 सीटों पर है। इसके साथ ही प्रदेश में निर्दलीय, सपा और बीएसपी के 7 विधायक हैं। कांग्रेस सभी सीटें उपचुनाव में जीत भी जाती है। तो उसे 2 बाहरी लोगों का समर्थन चाहिए।

    आसान नहीं कांग्रेस की राहें

    एमपी में कांग्रेस के नेता भी इन आंकड़ों से अवगत हैं। विधायकों के इस्तीफे से पार्टी लगातार प्रदेश में कमजोर होती जा रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ ने कहा था कि उपचुनाव के बाद हम फिर से सत्ता में वापसी करेंगे। पिछले दिनों ही उन्होंने कांग्रेस विधायक दल की बैठक में कहा था कि अगली बार में राजभवन में शपथ लेने के बाद ही मिलेंगे। लेकिन ये राह इतनी आसान नहीं है।

    पार्टी के अंदर से भी उठ रही है आवाज

    ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायक पहली बार कांग्रेस छोड़ कर चले गए थे। जुलाई महीने में भी 3 विधायकों ने इस्तीफा दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ गोविंद सिंह एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा था कि हमारी पार्टी में कोई एक-दूसरे को पूछने वाला नहीं है। सुख-दुख में कोई साथ नहीं देने वाला है। इसलिए लोग घर से भाग रहे हैं।

    अवसरवादी लोगों को मौका नहीं दें

    कांग्रेस के विधायक लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के साथ कमलनाथ भी एमपी में कमजोर हो रहे हैं। ऐसे में कमलनाथ ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए, एक चिट्ठी लिखी है। उसमें कहा है कि बीजेपी लगातार दूसरे दलों की सरकारें अनैतिक तरीके से गिराने की कोशिश कर रही है। पीएम से कमलनाथ ने कहा कि आप अवसरवादी लोगों को सरकार और पार्टी में मौका न दें।

    आत्मनिर्भर हो रहे हैं शिवराज

    शिवराज सिंह चौहान और उनकी टीम एमपी में लगातार कांग्रेस को झटके दे रही है। कांग्रेस के कम होते विधायकों के साथ शिवराज सिंह चौहान आत्मनिर्भर बन रहे हैं। सत्ता बरकरार रहे, इसके लिए उन्हें 9 सीटों की ही जरूरत है। वहीं, प्रदेश में 27 सीटों पर उपचुनाव हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के कुछ और विधायक अभी पार्टी छोड़ सकते हैं। ऐसे में शिवराज की निर्भरता ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के विधायकों पर कम हो जाएगी।

    ज्योतिरादित्य सिंधिया भी हो रहे हैं कमजोर

    दरअसल, शिवराज सिंह चौहान जैसे-जैसे आत्मनिर्भर बन रहे हैं, वैसे-वैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कमजोर होंगे। क्योंकि सरकार चलाने के लिए अभी तक शिवराज सिंह चौहान सिंधिया गुट पर ही निर्भर थे। उनके साथ कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद ही एमपी में शिवराज सिंह चौहान की सरकार बनी है। ऐसे में सरकार में सिंधिया का दबदबा था। कैबिनेट विस्तार से लेकर विभाग बंटवारे तक में उनकी चली है।

    27 सीटों पर उपचुनाव

    अब एमपी में 27 सीटों पर उपचुनाव हैं। 27 में से 22 लोग ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ आए थे। उन 22 में से भी 3 विधायक ऐसे हैं, जो सिंधिया गुट के नहीं हैं। इसके साथ ही कांग्रेस के 3 और विधायकों का इस्तीफा हो गया है। 2 सीट विधायकों के निधन से खाली है। कुल मिला कर प्रदेश की राजनीति में 8 सीट ऐसे हो गए हैं, जिनका ज्योतिरादित्य सिंधिया से सीधा कोई वास्ता नहीं हैं। ऐसे में इन सीटों पर जीत हासिल कर शिवराज सिंह चौहान किसी पर निर्भर नहीं रहने की कोशिश करेंगे।