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    तृणमूल छोड़ भाजपा में शामिल हुए मुकुल रॉय पार्टी या सरकार में चाहते हैं वजनदार पद

    Aug 14, 2020

    Kolkata. तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हुए मुकुल रॉय सिर्फ नाम नहीं बल्कि पार्टी या फिर सरकार में वजनदार पद चाहते हैं. उन्हें अच्छी तरह से पता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में बिना वजनदार पद पाए ‘कुछ करना’ काफी मुश्किल होगा. इसी स्थिति में वह केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हो या नहीं, कम से कम राज्यसभा सांसद बनाने के लिए उनके करीबी भाजपा सांसद कमर कसकर शीर्ष नेतृत्व से बात कर रहे हैं.

    उन्हें भाजपा में शामिल हुए तीन साल हो चुके हैं. लेकिन आज भी मुकुल पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति के एक साधारण सदस्य ही हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य में 18 सीटें जीतने के बाद उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि उन्हें पार्टी या फिर सरकार में बड़ा पद देकर सम्मानित किया जा सकता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. नतीजतन, अब जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव निकट आ रहा है, वैसे भाजपा में मुकुल समर्थक उन्हें वजनदार पद पर बैठाने के लिए सक्रिय हो गए हैं.

    मुकुल के करीबी कर रहे हैं लॉबिंग

    सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में भाजपा के कई नेता मुकुल को राज्यसभा सांसद बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. इसी कड़ी में पिछले माह बंगाल के दो सांसदों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की थी. क्योंकि, राज्यसभा सांसद बेनी प्रसाद वर्मा की मृत्यु के बाद, वहां एक सीट खाली हुई थी. उस सीट से मुकुल को राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन अंत में नहीं हो सका.

    हालांकि, मुकुल के करीब ने हार नहीं मानी. उनका अगला निशाना राज्यसभा सांसद स्वर्गीय अमर सिंह की सीट है. उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव नवंबर में होंगे. अमर सिंह की सीट भी शामिल है. इनमें से नौ सीटें भाजपा की पक्की है. भाजपा के भीतर यह निर्णय लिया गया है कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को दो सीटों के लिए नामित किया जाएगा. शेष सीटों से कौन-कौन प्रत्याशी होंगे, अक्टूबर की शुरुआत में अंतिम रूप दिया जा सकता है.

    अमर सिंह के निधन से रिक्त हुई सीट पर है नजर

    सूत्रों के मुताबिक अमर सिंह की मौत के बाद खाली हुई राज्यसभा सीट से पार्टी शीर्ष नेतृत्व भी मुकुल के नाम पर विचार कर रहे हैं. उस स्थिति में यदि मुकुल जीत जाते हैं तो वह लगभग दो साल तक राज्यसभा सांसद रहेंगे. इस दौरान बंगाल में विधानसभा का चुनाव संपन्न हो जाएगा और स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी. इसके बाद अमित शाह और जेपी नड्डा को मुकुल के भाग्य का फैसला करने में आसानी होगी.

    वहीं, दिल्ली के कुछ प्रभावशाली नेता भाजपा के केंद्रीय पदाधिकारियों की सूची में मुकुल का नाम शामिल करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सितंबर तक पार्टी के नए केंद्रीय पदाधिकारियों की सूची की घोषणा कर सकते हैं. अगर मुकुल का नाम राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में सूची शामिल होता है तो दिलीप घोष विरोधी नेताओं की राय है कि बंगाल-भाजपा में दिलीप घोष के ‘प्रभुत्व’ को थोड़ा नुकसान होगा.

    पार्टी के एक राज्य स्तर के नेता के शब्दों में मुकुलदा राज्यसभा सांसद या केंद्रीय पदाधिकारी बनना चाहते हैं. ताकि उन्हें बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं को प्रबंधित करने का फायदा मिले. कोई शक नहीं, अमित शाह भी विधानसभा चुनाव में मुकुल रॉय पर बहुत भरोसा करना चाहेंगे. उस स्थिति में उन्हें वजनदार पद देना ही है होगा. क्योंकि, भाजपा में बिना पद वाले नेताओं की कोई कीमत नहीं है.